दिल्ली, जंतर–मंतर -17 दिसंबर-राष्ट्रीय परशुराम परिषद के आह्वान पर आज राजधानी दिल्ली के जंतर–मंतर पर IAS अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान के विरोध में एक विशाल धरना–प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना–प्रदर्शन की अध्यक्षता श्री सुनील दत्त शर्मा जी राष्ट्रीय परशुराम परिषद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी चौबे तथा राष्ट्रीय परशुराम परिषद के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, श्री सुनील भराला विशेष रूप से उपस्थित रहे।
धरने को संबोधित करते हुए श्री सुनील दत्त शर्मा जी ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर आसीन अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से दिया गया आपत्तिजनक एवं विवादित बयान न केवल प्रशासनिक आचार–संहिता का उल्लंघन है, बल्कि वह सामाजिक समरसता, संवैधानिक मर्यादा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल भी है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने वक्तव्यों एवं आचरण में संयम, तटस्थता और संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखें, जिससे शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता अक्षुण्ण बनी रहे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा केवल एक पद या सेवा संरचना नहीं है, बल्कि वह संविधान के मूल्यों, लोकतांत्रिक आचरण और प्रशासनिक नैतिकता की प्रतिनिधि संस्था है। इस सेवा का मूल आधार निष्पक्षता, अनुशासन, तटस्थता तथा संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच से इस प्रकार का विवादित वक्तव्य देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। ऐसे वक्तव्य समाज में अविश्वास, असंतोष और भ्रम उत्पन्न करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता एवं प्रशासनिक अनुशासन दोनों प्रभावित होते हैं।
श्री चौबे ने सरकार से आग्रह किया कि कानून सबके लिए समान है और यदि किसी अधिकारी द्वारा संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया गया है, तो उस पर त्वरित, निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि शासन–प्रशासन में जनता का विश्वास बना रहे।
राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील भराला ने अपने संबोधन में कहा कि IAS अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा दिया गया बयान समाज को भ्रमित करने वाला तथा प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है। उन्होंने कहा कि यह वक्तव्य संविधान एवं प्रशासनिक उत्तरदायित्व की भावना के विपरीत है। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विधिसम्मत, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन एवं जवाबदेही का स्पष्ट संदेश जाए।

धरना–प्रदर्शन में अजय भारद्वाज जी , राष्ट्रीय अध्यक्ष, परशुराम स्वाभिमान सेना, रजनीश त्यागी जी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय परशुराम परिषद, विशाल भारद्वाज जी, सुश्री नीलम पांडेय जी, श्री जीवनन्द शर्मा जी ,राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश अध्यक्ष, जम्मू–कश्मीर, श्री हेमंत मिश्र , राष्ट्रीय अध्यक्ष, विप्र परशुराम रक्षा संघ तथा आयुष शर्मा शराफ हापुड़ सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, संत–महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर परशुराम शक्ति वाहिनी की सुश्री नीलम पांडेय जी, पूजा कौशिक, मीनू कौशिक, शिवानी सिंह, आकांक्षा शुक्ला जी ने सशक्त शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की आत्मा संवैधानिक मर्यादाओं, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सम्मान में निहित होती है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि जब प्रशासनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के वक्तव्य या आचरण से महिलाओं के स्वाभिमान, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तब समाज का मौन रहना स्वयं लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ अन्याय होता है।
सुश्री नीलम पांडेय ने कहा कि परशुराम शक्ति वाहिनी ने कहा श्री वर्मा का वक्तव्य केवल प्रशासनिक शुचिता का प्रश्न नहीं, बल्कि महिला-हित, नारी-गरिमा और सामाजिक न्याय से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से संविधानसम्मत, मर्यादित एवं उत्तरदायी आचरण की अपेक्षा करना लोकतंत्र की मूल शर्त है, विशेषकर तब, जब उनके शब्दों का प्रभाव समाज की आधी आबादी—महिलाओं—के आत्मसम्मान और विश्वास पर पड़ता हो।
उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि महिला स्वाभिमान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। यदि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग ही मर्यादाओं का उल्लंघन करेंगे, तो इसका सबसे पहला और गहरा प्रभाव महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान पर पड़ेगा। इसलिए ऐसे मामलों में स्पष्ट, कठोर और समयबद्ध कार्रवाई न केवल प्रशासनिक आवश्यकता है, बल्कि यह नारी-सम्मान और लोकतांत्रिक चेतना की भी अनिवार्य मांग है।

धरना स्थल पर “IAS संतोष वर्मा गिरफ्तार हो” तथा “प्रशासन में अनुशासन बहाल करो” जैसे नारे लगाए गए। इसके उपरांत, श्री अश्विनी चौबे एवं श्री सुनील भराला के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने जंतर–मंतर से कुछ दूरी तक पैदल मार्च किया, जिसे सुरक्षा कारणों से मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा रोक दिया गया।
अंत में राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, संवैधानिक मर्यादाओं तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। परिषद ने यह भी कहा कि जब तक इस मामले में न्यायोचित एवं ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रूप से जारी रहेगा।








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